राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 | यहाँ दबाएँ
श्री नरेंद्र मोदीमाननीय प्रधान मंत्री जी
निजी व्यवसाय अकेले ही मेक इन इंडिया पहल को उस ऊँचाई तक नहीं पहुँचा सकते, जहाँ वह तीव्र प्रतिस्पर्धा वाले, भारी पूँजी निवेश से संचालित वैश्विक उद्योगों के बीच पहुँचना चाहती है। भारत को इस प्रयास में और 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में सहकारी क्षेत्र की भूमिका की आवश्यकता है। सहकारी संस्थाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को मजबूत करने के संबंध में, प्रधानमंत्री ने कहा कि GeM पोर्टल ने सार्वजनिक-खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और कम लागत लायी है. प्रधानमंत्री के अनुसार, “सहकारिता की ताकत,विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संचालित सहकारी संस्थाओं की, लिज्जत पापड़ और अमूल जैसे विश्वप्रसिद्ध ब्रांडों में देखी जा सकती है।” इसी उद्देश्य से, सरकार ने देश में सहकारी-आधारित आर्थिक मॉडल को प्रोत्साहित करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढाँचा प्रदान करने हेतु नया सहकारिता मंत्रालय बनाया। भारत के पास इस क्षेत्र में सफल सहकारी आंदोलन के लिए पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है।
श्री अमित शाहमाननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री
श्री अमित शाह के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग सहकारिता मंत्रालय बनाकर सहकारी आंदोलन को नई गति और ऊंचाई दी है। उन्होंने सूचित किया कि विश्व की 30 लाख सहकारी समितियों में से 9 लाख केवल भारत में ही हैं। भारत की लगभग 91 प्रतिशत जनसंख्या किसी न किसी रूप में सहकारी संस्था से जुड़ी हुई है, और सहकारी समितियाँ PACS के माध्यम से देश के 70 प्रतिशत किसानों तक पहुँचती हैं। उन्होंने जोड़ा कि देश में 33 राज्य स्तरीय सहकारी बैंक, 363 जिला स्तरीय सहकारी बैंक और 99,556 PACS हैं। माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने आगे कहा कि आज 19 प्रतिशत कृषि वित्त सहकारी समितियों के माध्यम से प्रवाहित होता है। सहकारी समितियों का उर्वरक वितरण में 35 प्रतिशत, उर्वरक उत्पादन में 30 प्रतिशत, चीनी उत्पादन में 40 प्रतिशत, गेहूँ की खरीद में 13 प्रतिशत और धान की खरीद में 20 प्रतिशत योगदान है।
पंजीकरण/सदस्यता
हमारी पहचान
भारतीय बीज सहकारी समिति में आपका स्वागत है
भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल ) की स्थापना भारत सरक़ार की कैबिनेट द्वारा स्वीकृति के साथ दिनांक 25 जनवरी 2023 को बहु राज्य सहकारी समिति अधिनियम 2002 के तहत पंजीकृत किया गया है और इसे राष्ट्रीय सहकारी समिति का दर्जा दिया गया है। बीबीएसएसल को इंडियन फार्मर्स फर्टिलिसेर्स कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको), कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड (कृभको), भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड (नेफेड), राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा संयुक्त रूप से प्रमोटर सदस्यों के रूप में प्रवर्तित किया गया है, कृभको इस समिति का मुख्य प्रवर्तक है।
निदेशक मंडल
हमारा ध्यान
प्रमुख फसलें
हमारे साथ लाभ उठाएं
गुणवत्तापूर्ण बीजों में सहकारी समितियों की भूमिका
-
कुल उत्पादन में बीजों की गुणवत्ता का प्रत्यक्ष योगदान लगभग 15-20% है, जिसे अन्य आदानों के कुशल प्रबंधन के साथ 45% तक बढ़ाने के लिए सहकारी बीज समितियों का गठन किया गया है।
-
देश में 8.54 लाख पंजीकृत सहकारी समितियाँ हैं जिनमें 29 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। इन्हें संचालित करने के लिए समिति का गठन किया गया है।
-
सहकारी समितियों के माध्यम से उत्पादन, उन्नत परीक्षण सुविधा का विस्तार और बीज किस्म का परीक्षण उपज अंतर को कम करने में सहायक होगा।
-
खेत में संग्रहित बीजों के साथ-साथ पारंपरिक किस्मों के बीजों का उपयोग करने से फसल उत्पादन में कमी आती है, इसलिए गुणवत्तापूर्ण बीजों का उपयोग करना ही एकमात्र समाधान है।
News
हमारी गैलरी
हमारा न्यूज़लेटर

























































